एक सामान्य नंबर. एक बड़ी गलती.

आपको कभी भी अपना ओटीपी किसी के साथ शेयर क्यों नहीं करना चाहिए

यह धोखाधड़ी आमतौर पर इन कुछ आसान तरीकों से शुरू होती है.

आपको कभी भी अपना ओटीपी किसी के साथ शेयर क्यों नहीं करना चाहिए

यह धोखाधड़ी आमतौर पर इन कुछ आसान तरीकों से शुरू होती है.

किसी ऐसे व्यक्ति का फोन आता है, जो खुद को आपका बैंक मैनेजर बताता है.

एक मैसेज आता है, जिसमें लिखा होता है कि आपकी केवाईसी समाप्त हो रही है.

मुफ्त म्यूचुअल फंड कंसल्टेशन या बीमा लाभ के लिए तुरंत ऑफर दिए जाते हैं.

बातचीत में वे विनम्र और प्रोफेशनल भी लगते हैं. फिर वे वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मांगते हैं.

"सर, मुझे आपकी पहचान सत्यापित करने के लिए सिर्फ ओटीपी की आवश्यकता है."

"मैम, कृपया ओटीपी शेयर करें, ताकि हम आपके रिफंड को प्रोसेस कर सकें."

"हम आपका खाता अपडेट कर रहे हैं. कृपया हमें प्राप्त ओटीपी बताएं."

सुनने में तो लगता है कि कोई नुकसान की बात नहीं है, है न? यह सिर्फ सिर्फ छह अंक की बात है.

लेकिन असल में, ये छह अंक आपका बैंक खाता खाली कर सकते हैं.

ओटीपी क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

ओटीपी (वन-टाइम पासवर्ड) एक यूनीक कोड है, जो संवेदनशील ट्रांज़ैक्शन के दौरान आपकी पहचान सत्यापित करने के लिए आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेजा जाता है, जैसे लॉग-इन, पैसे ट्रांसफर करना, पासवर्ड बदलना या इन्वेस्टमेंट को अधिकृत करना.

यह आपके वित्तीय जीवन की डिजिटल चाबी मानी जाती है.

इसे शेयर करने का मतलब है कि अपना एटीएम पिन, चेकबुक और हस्ताक्षर आदि सभी चीजों को एक ही बार में किसी दूसरे को सौंप देना.

ओटीपी धोखाधड़ी में खतरनाक वृद्धि

जैसा कि,आरबीआई की वार्षिक धोखाधड़ी रिपोर्ट, बताती है किभारत में बैंकिंग धोखाधड़ीअधिकांशत- ओटीपी शेयर करने या डिजिटल क्रेडेंशियल चुराने से हुए डिजिटल भुगतान के कारण होती है.
https://bfsi.economictimes.indiatimes.com/news/banking/bank-frauds-jump-nearly-300-in-2-years-amount-involved-halved-rbi/110558792

मुंबई में ऐसे ही एक मामले में, एक महिला को ₹6.98 लाख से अधिक का नुकसान हुआ, क्योंकि उसने अनजाने में बैंक मैनेजर बने किसी व्यक्ति को ओटीपी बता दिया था.

https://www.thehindu.com/news/cities/mumbai/698-lakh-lost-by-sharing-otp-28-times/article24069504.ece

आज धोखाधड़ी करने वाले लोग तिजोरियों तो नहीं तोड़ते हैं, बल्कि वे अक्सर दबाव देकर या भय दिखाकर, स्वेच्छा से लोगों से अपनी बात मनवाते हैं.

धोखेबाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य तरीके

  • "बैंक, "टेलीकॉम कंपनियां" या "म्यूचुअल फंड हेल्पडेस्क" से नकली कॉल" आते हैं

  • आपके पास एसएमएस/ईमेल आता है कि अगर आप सत्यापन नहीं करेंगे, तो आपका खाता ब्लॉक हो जाएगा

  • नकली ऑनलाइन जॉब ऑफर या कैशबैक रिवॉर्ड की बात की जाती है

  • लॉटरी जीतने या इनकम टैक्स रिफंड देने वाले मैसेज आते हैं

इन सभी में कहा जाता है कि:

“कृपया अभी प्राप्त ओटीपी शेयर करें

इसके झांसे में मत आएं.

सुरक्षित कैसे रहें: ओटीपी सुरक्षा के लिए चेकलिस्ट

  1. कभी भी अपना ओटीपी किसी के साथ शेयर न करें-ऐसे किसी व्यक्ति के साथ भी नहीं शेयर करें, जो दावा करता हो कि वह आपके बैंक, म्यूचुअल फंड या बीमा कंपनी से बोल रहा है.

  2. कोई भी असली संस्थान कभी भी कॉल, एसएमएस या ईमेल पर ओटीपी नहीं मांगता है. अगर कोई ऐसा करता है, तो यह धोखाधड़ी है.

  3. रियल टाइम में ऐक्टिविटी को ट्रैक करने के लिए अपने बैंक खाता पर ट्रांज़ैक्शन अलर्ट एक्टिव करें.

  4. संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें या मैसेज या ईमेल से अज्ञात ऐप डाउनलोड न करें.

  5. जोखिम को कम करने के लिए अपने खाता, वॉलेट और यूपीआई पर ट्रांज़ैक्शन लिमिट सेट करें.

  6. अपने परिवार को शिक्षित करें, विशेष रूप से सीनियर सिटीज़न और किशोर, जिन्हें अक्सर लक्ष्य बनाया जाता है.

निष्कर्ष: यह सिर्फ एक ओटीपी है - जब तक कि यह गलत व्यक्ति के पास न पहुंच जाए

आज की डिजिटल दुनिया में, साइबर अपराधी केवल पासवर्ड के पीछे ही नहीं होते हैं, बल्कि भरोसा पाने की कोशिश भी करते हैं. और इसे पाने के लिए वे कुछ भी कह सकते हैं.

तो अगली बार जब कोई आपका ओटीपी मांगता है, याद रखें:
कोई भी विश्वसनीय संगठन कभी भी आपसे यह नहीं मांगेगा. सिर्फ एक धोखेबाज़ ही ऐसा करता है.

रोकें. सोचें. सुरक्षित करें.

आपका पैसा, आपकी पहचान और आपकी मन की शांति इस पर निर्भर करती है. आत्मनिर्भर इन्वेस्टर बनें-जागरूकता के साथ खुद को सशक्त बनाएं और सुरक्षित रहें.