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क्राउडफंडिंग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड
आधुनिक समय का जाल: कैसे "स्टार्टअप" और "समाज सेवा" के लिए सहयोग कर रहा है ठगी को सपोर्ट
बढ़ते फर्जी क्राउडफंडिंग इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म से सावधानआधुनिक समय का जाल: कैसे "स्टार्टअप" और "समाज सेवा" के लिए सहयोग कर रहा है ठगी को सपोर्ट
बढ़ते फर्जी क्राउडफंडिंग इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म से सावधान
इसकी शुरुआत अक्सर भावनात्मक अपील या शानदार आइडिया से होती है.
नए युग के स्टार्टअप“भारत का अगला यूनिकॉर्न होने का दावा करते हैं.”
कोई सामाजिक उद्यम दावा करता है“जीवन में बदलाव, एक बार में एक डोनेशन के साथ.”
एक आकर्षक क्राउडफंडिंग पेज का वादा हैछोटे इन्वेस्टर्स के लिए इक्विटीऔर“फंडिंग बंद होने के बाद 10x रिटर्न.”
सब कुछ बिल्कुल असली दिखता है - लोगो, टेस्टिमोनियल, यहां तक कि संस्थापकों की फोटो भी.
आप यह मानते हुए एक छोटी सी राशि का इन्वेस्ट करते हैं कि आप किसी नए विचार या समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले काम को सहयोग दे रहे हैं.
कुछ हफ्तों बाद, वेबसाइट गायब हो जाती है, फोन नंबर काम करना बंद कर देते हैं - और आपकी आशाएं भी डूब जाती हैं.
और लो अभी-अभी एक फेक क्राउडफंडिंग इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म आपको ठग चुका है.
क्राउडफंडिंग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड क्या है?
क्राउडफंडिंग व्यक्तियों को बिज़नेस वेंचर, स्टार्टअप या सामाजिक सेवा से जुड़े कामों के लिए - ऑनलाइन पैसे जुटाने में सक्षम करती है. जहां असली क्राउडफंडिंग एक शक्तिशाली टूल साबित हो सकती है, वहीं ठग इसका इस्तेमाल इन्वेस्टर्स और डोनर्स को बेवकूफ बनाने के लिए करते हैं.
यहां जानें, यह कैसे कार्य करता है:
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खुद को समाज सेवा के कार्यों के लिए एक स्टार्टअप की तरह दिखाते हुए, वे एकनकली वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज बनाते हैं.
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वे उच्च इक्विटी रिटर्न, आईपीओ तक जल्दी एक्सेस, या लाभ-शेयर करने का वादा करते हैं.
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वे हजारों लोगों से छोटी-छोटी राशि इकट्ठा करते हैं - जो एक व्यक्ति के लिए तो बहुत कम होती है, लेकिन एक साथ मिलकर एक बड़ी रकम बन जाती है.
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अच्छी-खासी रकम जुटाने के बाद ये गायब हो जाते हैं.
अक्सर, भरोसा जीतने के लिए ये स्कैमरभावनाओं और जल्दबाजी का उपयोग करते हैं - जिसमें सामाज सेवा की भावनात्मक अपील के साथ स्टार्टअप का उत्साह शामिल होता है.
खतरे की घंटी
साइबर क्राइम रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया, टेलीग्राम ग्रुप और व्हाट्सऐप चैनलों पर नकली क्राउडफंडिंग सोशल कैंपेन में सैकड़ों भारतीय अपने पैसे गंवा चुके हैं.
कभी-कभी कई इक्विटी आधारित स्टार्टअप स्कैम भी होते रहते हैं. इसके सबसे आम पीड़ित कौन हैं? छोटे रिटेल इन्वेस्टर्स - जो यह सोचकर ₹5,000 - ₹50,000 का योगदान देते हैं कि, "किसी अच्छे आइडिया के लिए मदद करने में क्या नुकसान है?"
ये स्कैम आपको कैसे लुभाते हैं
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इमोशनल कहानी सुनाकरः "हम हैं महिला नेतृत्व वाली टीम, जो धरती को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है."
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प्रोफेशनल जैसी दिखने वाली वेबसाइट और नकली "इन्वेस्टर अपडेट" दर्शाने वाला डैशबोर्ड
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"ईएसजी", "इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग, "प्री-सीड राउंड", "एंजल पार्टिसिपेशन" आदि जैसे आकर्षक और फैशन में प्रचलित शब्दों का प्रयोग करके.
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प्री-आईपीओ या शुरुआती चरण की इक्विटी में "एक्सक्लूसिव एक्सेस" का दावा करने वाले मैसेज.
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रजिस्टर्ड बिज़नेस इकाइयों के बजाय पर्सनल खाते या वॉलेट में पैसे ट्रांसफर करने का अनुरोध करके.
क्राउडफंडिंग स्कैम से खुद को कैसे बचाएं
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कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय (MCA) की वेबसाइट पर कंपनी का रजिस्ट्रेशन विवरण चेक करें.
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समाज सेवा के उस कार्य की प्रामाणिकता चेक करें जिसके लिए पैसे जुटाए जा रहे हैं. यह मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक बहाना भी हो सकता है.
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छोटे इन्वेस्ट के "इक्विटी" वादों से सावधान रहें - असली इक्विटी इन्वेस्टिंग हमेशा लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म या अधिकृत ब्रोकरों के माध्यम से की जाती है.
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गारंटीड रिटर्न प्रदान करने वाले कैम्पेन से बचें - कोई सही स्टार्टअप ऐसा नहीं करता है.
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कभी भी पर्सनल खाते में पैसे ट्रांसफर न करें या न ही उन यूपीआई आईडी के लिए करें, जो बिज़नेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हों.
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पारदर्शिता चेक करें - असली स्टार्टअप सत्यापित संपर्क विवरण, संस्थापकों की लिंक्डइन प्रोफाइल और ऑडिटेड डॉक्यूमेंट शेयर करते हैं.
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सेबी या cybercrime.gov.in को संदिग्ध प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट करें या अनुरोध करें.
आखिरी सलाह: सहानुभूति होना अच्छा है. लेकिन सत्यापन करना बेहतर है.
नई सोच और एंटरप्रेन्योरशिप का सहयोग करना बहुत अच्छा है - लेकिन अपनी सुरक्षा की कीमत पर नहीं.
स्कैमर भलाई और सामाजिक प्रगति की भाषा में लालच और धोखाधड़ी को छिपाने लगे हैं.
आत्मनिर्भर इन्वेस्टक बनें - किसी अनजाने प्लेटफॉर्म पर अगले "बिग आइडिया" में इन्वेस्ट करने से पहले रुकें. सोचें, और सत्यापन करें.
क्योंकि एक सच्चा स्टार्टअप भरोसा जमाता है - जाल नहीं फैलाता.


